ध्येय वाक्य अन्य»
आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है। उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो।
- स्वामी विवेकानंद
January 28, 2012 VHV Web
 
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गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच आतंकी हमले की आशंका

भारत अपना 63वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। लेकिन इस खुशी पर आतंकी साजिश का साया भी मंडरा रहा है। देश की खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने अलर्ट जारी किया है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली और 6 अन्य शहरों को कई आतंकी संगठन साथ मिलकर अपना निशाना बना सकते हैं।...

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श्रीरामजन्म भूमि
श्री मोहनराव भागवत
अर्थ-वाणिज्य
सीआरआर में कटौती, कर्ज लेना होगा आसान

भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) आधा प्रतिशत घटाकर 5.5% करने की घोषणा की। बैंक ने नीतिगत ब्याज दर वर्तमान स्तर पर बरकरार रखी है। रेपो दर भी 8.5 प्रतिशत पर कायम है। यह परिवर्तन 28 जनवरी से प्रभावी होगी।...

खेल
अंतिम टेस्ट मैचों में कड़ी सुरक्षा चाहता है भारत

पर्थ। सिडनी में पिछले हफ्ते दर्शकों ..

 
जियो तो ऐसे

वन्देमातरम बोलने पर निष्कासित हुए डा. हेडगेवार
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विश्लेषण
सुरक्षा रणनीति में बदलाव

ले.ज. (से.नि.) श्रीनिवास कुमार सिन्हा

रक्षा की अनदेखी चिंता का गम्भीर विषय है। सेना द्वारा पिछले 30 सालों से की जा रही मांग के बावजूद हम अभी तक मझौली तोपें प्राप्त नहीं कर पाए हैं। इसी प्रकार आधुनिक लड़ाकू विमान और विमानवाही जहाजों की खरीद में भी हमारा रवैया ढुलमुल रहा है। माउंटेन डिवीजन बनाने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है और एक माउंटेन कोर को तो अभी मंजूरी ही नहीं मिली है।...

समसामयिक
ऐसा हो गणतंत्र हमारा

विनोद बंसल

26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ। संविधान सभा का यह मत था कि जिस रूप में यह लागू किया जा रहा है वर्तमान परिस्थितियों में तो सर्वोत्तम है किन्तु समय-समय पर देश की परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन भी आवश्यक हैं। तब से अब तक विदेशों के संविधानों से नकल किये गये प्रावधानों में अनेक संशोधन तो हुए किन्तु अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आये।...

इतिहास साक्षी
प्रार्थना
ब्लॉग
कश्मीर पर निरर्थक बातें

पवन कुमार अरविंद

जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि देश के किसी भी सीमावर्ती राज्य को सेना से मुक्त करना घातक है। चाहे कश्मीर में पूरी तरह सामान्य स्थिति ही बहाल क्यों न हो जाये, जम्मू-कश्मीर में सैन्य बल को सदैव तैनात रहना ही चाहिए। सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद सेना अपनी बैरकों में वापस जा सकती है, लेकिन इस अवस्था को विसैन्यीकरण नहीं कहा जा सकता।...



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