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| दृष्टिकोण |
| विश्लेषण |
सुरक्षा रणनीति में बदलाव
ले.ज. (से.नि.) श्रीनिवास कुमार सिन्हा रक्षा की अनदेखी चिंता का गम्भीर विषय है। सेना द्वारा पिछले 30 सालों से की जा रही मांग के बावजूद हम अभी तक मझौली तोपें प्राप्त नहीं कर पाए हैं। इसी प्रकार आधुनिक लड़ाकू विमान और विमानवाही जहाजों की खरीद में भी हमारा रवैया ढुलमुल रहा है। माउंटेन डिवीजन बनाने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है और एक माउंटेन कोर को तो अभी मंजूरी ही नहीं मिली है।... |
| नासमझी में बन गया नासूर |
| मंत्र-विप्लव |
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| समसामयिक |
ऐसा हो गणतंत्र हमारा
विनोद बंसल 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ। संविधान सभा का यह मत था कि जिस रूप में यह लागू किया जा रहा है वर्तमान परिस्थितियों में तो सर्वोत्तम है किन्तु समय-समय पर देश की परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन भी आवश्यक हैं। तब से अब तक विदेशों के संविधानों से नकल किये गये प्रावधानों में अनेक संशोधन तो हुए किन्तु अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आये।... |
| आज भी अपने घरों से विस्थापित कश्मीरी हिन्दू |
| चुनाव आयोग की बेबसी |
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| ब्लॉग |
कश्मीर पर निरर्थक बातें
पवन कुमार अरविंद जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि देश के किसी भी सीमावर्ती राज्य को सेना से मुक्त करना घातक है। चाहे कश्मीर में पूरी तरह सामान्य स्थिति ही बहाल क्यों न हो जाये, जम्मू-कश्मीर में सैन्य बल को सदैव तैनात रहना ही चाहिए। सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद सेना अपनी बैरकों में वापस जा सकती है, लेकिन इस अवस्था को विसैन्यीकरण नहीं कहा जा सकता।...
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